Tuesday, July 15, 2008

कुछ छूट गया है

शायद कुछ छूट गया है;

दर्द दिया जो तूने मुझको
भूल गया मैं उन सबको पर,
दिल से उनका था अपनापन
वो अपनापन टूट गया है ,
शायद कुछ छूट गया है;

तेरे गम को भूल गया मैं
खंडहरों में महल बनाकर,
पर कंकर-पत्थर से पिटकर
भोला दिल टूट गया है ,
शायद कुछ छूट गया है;

लहू से लथपथ दिल था मेरा
घाव सुखाया उसे तपाकर,
यादों का उनसे था बंधन
अब बंधन टूट गया है ,
शायद कुछ छूट गया है .

Friday, March 07, 2008

प्राची के बादल









नया
सवेरा अभी हुआ पर
है प्राची में बादल छाया ,
धरती की सूनी किस्मत पर
आज विधाता फिर मुस्काया ;

अब बादल छाये ,छाने दो
मैं बिजली बन जाता हूँ ,
इन बादल से छिप-छिपकर
चिर-आलोक लुटाता हूँ ;

या करो मूझे शक्ति प्रदान
मैं प्राची में जाता हूँ ,
घनघोर तिमिर की मुट्ठी से
सूरज लूटकर लाता हूँ

Tuesday, November 06, 2007

मैं और तुम

तुम नदी की चंचल धारा हो
मैं उसी नदी का एक
किनारा ,
तुम तेज
गति से चलती हो
और शांत सा स्वभाव हमारा ;


सागर-
मिलन को उत्सुक तुम
मैं
इंतजार करता बेचारा ,
दिल को छूकर कह देती हो
साथ
ना होगा कभी हमारा ;

तुम तो कोई राह नयी
हो
मैं थका हुआ एक राही हारा,
एक बार
कभी रुक जाओ
थाम सकुं मैं हाथ तुम्हारा

Wednesday, October 03, 2007

नागमणि

हाय  रे  विधाता 
ये तुमने क्या किया
इतनी बहुमूल्य मणि
किसके सिर पर दे दिया
एक तो वह नाग है
दुष्टता की आग है ...
हर फन में उसके
जहर ही जहर है ,
क्रोध में उसके
कहर ही कहर है ;
उसके सिर पर नागमणि
हे विधाता
तु कैसा महादानी ?

सुनकर विधाता घबराये
फिर हौले से मुस्कुराये
वह कोई मणि नही
चमकता पत्थर मात्र है ,
वो तुच्छ नाग ही
जिस तुच्छता का पात्र है ,
वह बहुमूल्य इसलिये है
की उस दुष्ट के पास है ,
दुर्लभ जिसकी आस है ;

मैंने
फिर नागमणि की ओर देखा

देखकर ललचाया
फिर सोच मन बहलाया
ये तो बहुमूल्य नाहीं है
शायद !! विधाता ही सही है ...

Wednesday, September 26, 2007

नाग और नेवला

एक बार की है बात
नागजी से हुई नेवला की मुलाकात,
बातचित की हुई शुरुआत;
नेवला ने कहा प्रणाम
नागजी बोले राम-राम,
अरे नेवला
तुम्हारा नाम हमने बहुत सुना है
बोल तो सही तेरा 'credential' क्या है?

नेवला को 'english' भला आया नहीं
'credential' मतलब समझ पाया नहीं,
बोला नागजी
वैसे तो बहुत है
मगर आप अपनी बता देते
तो हम अपनी अनुमान लगा लेते;

नाग कुटिलता से हंसा
की नेवला बेचारा तो फंसा,
देखो पास है नागमणि ये
साथ में नागिन रानी ये,
मेरे कोप से मेढक,चूहे भागते हैं
कुछ तो रात-रात भर जागते हैं,
मेरे गरल-दंश से इंसान परेशान है
मनाता नाग-पंचमी, मानता भगवान् है;
शंकर का मित्र,विष्णु का सवारी
दुनिया कहती मैं हूँ इच्छाधारी;
बोलकर नागजी किए अट्टहास
नेवला रह गया चुपचाप,

वह सोच में पड़ गया
सोचकर अफ़सोस कर गया,
सचमुच उसे तो नागिन लोग भी प्यार करती है
मुझे तो देखते ही फुफकार भरती है,
लोग उसकी पूजा करते हैं
मुझे बच्चे भी छेड़ते हैं,
नागजी तो GOD आदमी है
मुझमें ही कुछ कमी है,
नाग हँसते-हँसते चला गया
नेवला सोचते ही रह गया.....