प्रेरणा बनके मैं दुनिया की
प्रेरणा अपनी मैं खो दिया हूँ।
राहों में सबके ये दीपक जलाए
मन का अँधेरा मिटा नहीं पाया,
और उन अंधेरों में राहों को ढूंढता
ठोकर हमेशा मैं खाके जिया हूँ ;
प्रेरणा बनके मैं दुनिया की
प्रेरणा अपनी मैं खो दिया हूँ।
सागर में मथनी चलाने वालों
अब मेरे पास वापस न आना,
सागर से अमृत निकले, न निकले
विष जो भी निकला मैं ही पिया हूँ;
प्रेरणा बनके मैं दुनिया की
प्रेरणा अपनी मैं खो दिया हूँ।
Friday, April 10, 2009
Friday, April 03, 2009
कोई मुझे आवाज़ न दो
आज पुरानी राहों से
कोई मुझे आवाज़ न दो;
उन आंखों में कोई सपना था
उन सपनों में था नाम तेरा,
तेरे नाम का मैं दीवाना था
तू शमां थी मैं परवाना था ;
अब तन्हा मुझको रहने दो
तन्हाई ये आबाद न हो ,
आज पुरानी राहों से
कोई मुझे आवाज़ न दो ।
कोई मुझे आवाज़ न दो;
उन आंखों में कोई सपना था
उन सपनों में था नाम तेरा,
तेरे नाम का मैं दीवाना था
तू शमां थी मैं परवाना था ;
अब तन्हा मुझको रहने दो
तन्हाई ये आबाद न हो ,
आज पुरानी राहों से
कोई मुझे आवाज़ न दो ।
Tuesday, February 24, 2009
सच या सपना

सच में रहूँ या सपनों में
ये बात समझ नही पाता हूँ ;
सच भी मुझे बुलाता है
सपने भी मुझे बुलाते हैं,
सच भी मुझे रुलाता है
सपने भी मुझे रुलाते हैं;
सपनों में उलझ सा जाता हूँ
सच से भी धोखा खाता हूँ,
सच में रहूँ या सपनों में
ये बात समझ नही पाता हूँ ।
ये सपने तो क्षणभंगुर हैं
सच यही मुझे सुनाता है,
ये सच पर नीरस सा है
सपना यही मुझे दिखाता है;
सच की सुनूँ या सपने देखूं
इस द्वंद में मैं रह जाता हूँ,
सच में रहूँ या सपनों में
ये बात समझ नही पाता हूँ ।
Saturday, February 14, 2009
सितारों का जीवन ....THE STAR LIFE
सितारों में क्या देखते हो ?या देखकर क्या सोचते हो ?
क्या तुमने अपने चिंतन में कभी उसे महसूस किया है ?
गौर से उसकी ओर देखो....
कभी आसपास के सितारों को
देख रहा है,
कभी धरा पर नज़र फ़ेंक रहा है
कि लोग उसे क्यों देख रहे हैं ?
कभी सूय ताप लेकर आ चमकता है,
कभी चाँद दर्प लेकर आ धमकता है ,
कभी बादल, कभी बिजली, कभी बारिश,
पता नहीं....वह कब संभलता है !
आज वह गर्दिश में है
पूर्ण चाँद के दबिश में है,
(अब उसको कैसे देखें
आओ उसे महसूस करें...)
इन सितारों का जीवन
कई पहेलियों से भरा है,
हर एक सितारा यहाँ
कई सितारों से घिरा है ।
कहीं कोई तारा घुट रहा है
कहीं कोई तारा टूट रहा है ।।
- आलोक-
Thursday, January 29, 2009
मैं इसे महसूस करता था
मैं इसे महसूस करता था
और तुम इसे जी रहे हो !
कभी शब्दों में
कभी गीतों में
कभी भावों में
कभी अर्थों में
कभी वेदना
कभी संवेदना
कभी कल्पना ,
मैं इसे महसूस करता था
और तुम इसे जी रहे हो !
इस घुटन को
इस बंधन को
इस संघर्ष को
इस जीवन को
इक इच्छा
इक हौसला
इक परिणाम,
मैं इसे महसूस करता था
और तुम इसे जी रहे हो !
और तुम इसे जी रहे हो !
कभी शब्दों में
कभी गीतों में
कभी भावों में
कभी अर्थों में
कभी वेदना
कभी संवेदना
कभी कल्पना ,
मैं इसे महसूस करता था
और तुम इसे जी रहे हो !
इस घुटन को
इस बंधन को
इस संघर्ष को
इस जीवन को
इक इच्छा
इक हौसला
इक परिणाम,
मैं इसे महसूस करता था
और तुम इसे जी रहे हो !
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