Sunday, June 24, 2007

वेदना और बहुव्यक्तितव












किसी मन में गहरी वेदना है
अगर तीव्र उसकी संवेदना है,
तो कभी-कभी सोचता हूँ
उसका क्या हाल होता होगा
कैसे वह गम पीता होगा
कैसे जीवन जीता होगा ?

क्या उसके ह्रदय में घुटन
का अहसास नही होता होगा?
क्या उसका मन नही रोता होगा ?

शायद होता ही होगा उसे
अनेक दुखों का अहसास ,
विकल होता होगा ह्रदय
रूकती रहती होगी सांस ;

मगर साँसे रूक सकती नही
उसे जीवन में विश्वास है ,
अगर दुःख उसे अनायास है
तो शायद दवा भी पास है ;

जो समस्यायों से जूझता होगा
उसी के पास समाधान होता होगा,
उस व्यक्ति के अन्दर ही एक
अलग व्यक्तित्व का निर्माण होता होगा,
उस व्यक्ति को अगर ये ज्ञान नही
तो वो बिल्कुल परेशान होता होगा ;

क्यूंकि वो अलग व्यक्तित्व ही
दुःखों का समाधान करता होगा ,
जिसका प्रतिकूल सा असर
उस व्यक्ति पर भी पड़ता होगा ;

आज इस निराशा के दौड़ में
सब के सब ही लोग हतास हैं,
यही एक वजह है कि आज
बहुव्यक्तित्व सबके पास है ॥


-Related with Freud theory of psychology-

Friday, May 18, 2007

आत्म-छवि और अंतर्द्वंद










हम जिस पर विचार करते हैं
और नही व्यवहार करते हैं ,
जिसपर सिर्फ़ हम सोचते हैं
जिसका सत्य नही खोजते हैं ,
जो कल्पना के दर्पण में
हमारा मन बहलाता है ,
वह आत्म-छवि कहलाता है ।

आत्म-छवि हमारा ही एक रूप है
हमारे स्वप्न का एक स्वरूप है ,
स्वप्न के बाहर भी एक संसार होता है
संसार भी हर छवि का एक बीज बोता है,
वह बीज भी वृक्ष बन जाता है
जो सामाजिक छवि कहलाता है
सामाजिक छवि का अपना ही मान है
जिसका हर किसी को सदा ध्यान है ।

कभी आत्म छवि तो उससे मेल खा जाते है
कभी आईने में उलटी तस्वीर नज़र आते है ,
और तब दोनो छवि आपस में टकराते है
समाज के साथ हम भी परेशान हो जाते हैं ,
इस टकराव का कभी परिणाम आता है
कभी यही एक 'अंतर्द्वंद' बन जाता है ।

ये अंतर्द्वंद एक स्थिति है
जिसमें विजय की आस नही ,
करते हम प्रयास नही
रहता मन में विश्वास नही ,
हार कर भी जीत का आभास होता है
कभी जीत कर भी मन बहुत रोता है ,

समाज से कह दो मेरी छवि छीन लें
अब मैं
आत्म-छवि अपना रहा हूँ ,
अब अंतर्द्वंद करने की ताक़त नही
मैं तुमसे द्वंद करने रहा हूँ


-A conflict between Ego and Superego- related to Freud theory of psychology-





Tuesday, May 15, 2007

अंधकार










मूझे डर लगता है अंधकार से
किसी अपशकुन के विचार से,
शायद इसलिये देता हूँ प्रहार कर
हर जगह किसी अन्धकार पर ।

हम प्रहार उसी पर करते हैं
जिनसे हम किसी तरह डरते हैं ,
कोई हम पर प्रहार करता है
शायद हमसे वह डरता है ।

हम अन्धकार से डरते हैं
अन्धकार हमसे डरता होगा ,
हम अन्धकार से लड़ते हैं
अन्धकार हमसे लड़ता होगा ।

अन्धकार में जीने की आदत नही
उजाले की कोशिश में रहता निरंतर ,
तमसो माँ ज्योतिर्गमय जपता
आता रहा हूँ युग और युगान्तर ।

आओ अन्धकार मैं ललकारता हूँ
डरता हूँ मगर मैं मजबूर हूँ ,
कितना भी कमजोर कर दे मुझे
ताक़त से अब भी मैं भरपूर हूँ

- Possessed by some brutal Superego-who speak here-it seems so-That time I was in major depression and write these lines-

Tuesday, April 17, 2007

सूर्यग्रहन


एक
दिन जब सूर्यग्रहन आता है

चंद्रमा सूर्य पर जा छाता है,

सूर्य का तो तेज चला गया,

उसको लगा

ये तो अन्याय हो गया.

पर चंद्रमा क्या करता

उसने तो एक ही राह अपनाया है,

ग्रह, नक्षत्र और तारे

जब जो मिला उसपर वो छाया है;

पर आज उसी राह पर सूर्य है

वह बहुत प्रयास करता है,

तरह-तरह के जज्वात भरता है;

कि रूक जाता हूँ

पर उसे बढ़ना पड़ा

सूर्य पर चढ़ना पड़ा.

पर सूर्य ये नही बतलाता है

कहने से भी कतराता है,

कि उसने कब चद्रमा पर न्याय किया है?

कभी पूरा तो कभी आधा प्रकाश दिया है.

पर चंद्रमा चुपचाप रहा

किसी से उसने क्या कहा?

अमावश्या कि रजनी आयी

उसने पर इन्तजार किया था,

पूर्णिमा धरा पर छायी

उसने जग को गुलजार किया था;

इसलिये सूर्य कि शिकायत का अर्थ नही है,

ये सूर्यग्रहन भी अब कोई अनर्थ नही है

Sunday, April 08, 2007

इम्तिहान

सारी दुनिया से तुम दोस्ती कर लो

मुझे तुमसे दोस्ती का हक़ नही क्यों,

पूरी दुनिया से तुझे बेरुखी है

मुझपर तुम्हें कोई शक नही क्यों?

मैं भी उसी जमाने की उपज हूँ

जिस जमाने से सारे लोग डर रहे हैं,

कोई फरिस्ता नही मैं इस धरती पर का

क्यों लोग मुझपर विश्वास कर रहे हैं;

मैंने भी झूठ का सहारा लिया है

कितनो को रास्ते से किनारा कर दिया है,

ये बात अलग है की इन कारणों ने ही

हालत ये नाजुक हमारा कर दिया है;

कब तक हमारा ही इम्तिहान होगा

लोग यहाँ पंक्ति में कब से खड़े हैं,

यहाँ तक पहुँचने भर के लिए ही

ये जाने कितनो से कब तक लड़े हैं;

इम्तेहां ये इंतजार की हो गई अब

नतीजे को अब तो निकलना ही होगा,

तुम्हें चलना होगा खंजर की धार पर

या मुझे इन धारों पर चलना ही होगा।


-Rebel line : a soul want redemption-