Tuesday, April 09, 2013

अनजान परिंदे
















अनजान परिंदे आ जाना !
मेरे दिल का पिंजरा खाली है
इसमें कोलाहल कर जाना।

तेरे कोलाहल को सुनकर
मेरे मन के उपवन के
सभी सुमन खिल जायेंगे,
और खिलेंगे जीवन के
सारे मुरझाये सपने ;

ये सपने हैं बड़े रंगीले
लाल, बैंगनी, नीले, पीले
इन रंगों को चुन लेना तुम
अपने सपने बुन लेना तुम।

अनजान परिंदे आ जाना !
मेरे दिल का पिंजरा खाली है
इसमें कोलाहल कर जाना।


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