Saturday, September 13, 2008

चंचलता

आज हवा के झोकों ने
मुझे जगाकर ये पूछा
किसके ख़्वाबों में डूबे हो
क्या है उसका नाम बता ?


मैंने कहा कि सुन ऐ हवा
ख्वाब से तुझको लेना क्या
तू ठहर जरा और बोल जरा
क्यूँ है तू इतना चंचल सा ?

ये पेड़ बुलाते हैं मुझको
ये नदी बुलाती है मुझको
ये बादल मुझे बुलाता है
ये वर्षा मुझे बुलाती है ;

सब लोग बुलाते हैं मुझको
इसलिए है मुझमें चंचलता
तू भी अपना ख्वाब छोड़ दे
अब और नहीं ठहर सकता


Tuesday, September 02, 2008

अभिशापित

जिसकी शीतल किरणों ने
इस जग को गुलजार किया ,
जिसकी अद्भुत सुन्दरता की
चर्चा जी-भर संसार किया;

पर देख दाग अपने तन पे
चाँद हमेशा कुंठित क्यूँ है ,
चंदा तू अभिशापित क्यूँ है?

सृष्टि को जो पथ दिखलाया
अन्धकार को दूर भगाया,
ठिठुर रही थी धरती ये
अपने ताप से उसे बचाया;

पर अपने ही तापमान से
रवि हमेशा पीड़ित क्यूँ है ,
सूरज तू अभिशापित क्यूँ है ?

जो युग-युग का प्रहरी है
और देश की
रक्षा की है,
भारत का मस्तक ये है
उदगम ये गंगा की है ;

पर अपने एकाकीपन से
गिरिराज हमेशा चिंतित क्यूँ है ,
गिरिवर तू अभिशापित क्यूँ है?

Thursday, July 24, 2008

बरसात की इस रात में

बरसात की इस रात में
कहना है तुमसे बात एक ,
सुन सको तो सुन लो तुम
कहता हूँ तुमसे बात एक

बरसात की ये बूँदें आज
बिखरी है देखो तिनकों पर,
चुन सको तो चुन लो तुम
जिसमें दिखे विश्वास एक

विश्वास है ये बूंद की
कि वह रहेगी बूँद ही,
जब तक सिखला दे हमें
प्रेम का नया पाठ एक

बरसात की इस रात में
कहना है तुमसे बात एक

Tuesday, July 22, 2008

सपना

कल रात को मेरे सपने में
मेरी आंखों के पलकों पर,
हलचल सी मची ;
मैंने देखा , मैंने पाया
पंख लगे हैं बाहों में और
मन चंचल है ;
उड़ने को किसी आसमान में
जहाँ हो कोई सीमाये ,
और हम उनमें पंख फैलायें
विहगों से बातें कर लें।

कल रात को मेरे सपने में
मैंने देखा , मैंने पाया
पंख कटे हैं बाहों से और
दलदल है ;
मैं पड़ा हुआ उस दलदल में
उड़ने की कुंठा को लेकर,
आसमान को ताक रहा
विहगों से मैं जल-भुनकर।

Thursday, July 17, 2008

दूरी

तेरा समीप मैं पा जाऊं
जीवन नया रचा पाऊं ,
ये स्वप्न हमारा-तुम्हारा पर
स्वप्न अभी तक कच्चे हैं ,
हम दूर ही अच्छे हैं;

दूर हमारी आंखों से पर
मन ये मेरा तेरा ही घर ,
मन की सुंदर बगिया में
तेरे नाम के गुच्छे हैं ,
हम दूर ही अच्छे हैं;

पास अगर आए तुम तो
दिल धड़क जाए ये मेरा ,
फिर टूट जाए दिल से जो
विश्वास हमारे सच्चे हैं ,
हम दूर ही अच्छे हैं ।।