Saturday, August 05, 2006

शर-संधान

अर्जुन अब क्या सोच रहे हो
देखो रवि निकल आया है,
वचन-पूर्ण कर लो अपना
ये सब तो मेरी माया है;

केशव का ये देख इशारा
शर-संधान किया अर्जुन ने,
पल-भर में ही जयद्रथ को
मार गिराया भीषण रन में;

आज भी केशव जगत में
अर्जुन निज को तुम पहचानो,
वक्त की करवट को देखो
अपने निज लक्ष्य को जानो;

देख उनका भी इशारा
लक्ष्य को तुम छोड़ दोगे,
वक्त से होकर विवस तुम
कर्म से मुंह मोड़ लोगे;

फ़िर आगे तब कौन लडेगा
अभिमन्यु अभी और मरेंगे,
तेरा अंत नही है सबकुछ
युद्ध यहाँ तो चलते रहेंगे;

अपने मन में सु-विचार भर
निज-विद्या का ध्यान करो,
आज भी किसी कुरुक्षेत्र में
जयद्रथ पर शर-संधान करो।

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