Wednesday, August 09, 2006

सोच और शक्ति

आज अगर मैं झुकता हूँ
सदा-सदा को झुकना होगा,
आज अगर मैं रुकता हूँ
यही मुझे फ़िर रुकना होगा;

मैं तो सिर्फ़ सोच हूँ
वो तो कोई शक्ति है,
मैं श्रधा कोई तेरा
वो तो तेरी भक्ति है;

आज सोच क्या लड़ पायेगा
शक्ति से टकरा जायेगा,
वो टूट-टूट बिखरेगा या
समर-विजेता बन जायेगा;

भविष्य तुझे बतलायेगा
वर्तमान अभी चल रहा है,
सोच को आगे देख बढ़ते
शक्ति आज कोई जल रहा है;

अब तो दोनों टकरायेंगे
अपने-अपने सुर गायेंगे,
हम तो बस दर्शक ठहरे
चुप-चाप देखते जायेंगे.

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